Desh Raj Sirswal
Desh Raj Sirswal campaign leader

भारत में नारी समस्याएं एवम सह -शिक्षा – देशराज सिरसवाल

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को देवी जैसा पद दिया गया हैं, वहाँ पर नारी का बहुत सी समस्याओं से  गुजरना इसके सांस्कृतिक मूल्यों और यथार्थ के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। आज के परिवेश  में जहाँ पर नारी और गरीब लोगों की सामाजिक सुरक्षा दाव पे लगी है और वहाँ  के तथाकथित नेता अपने घोटालों और सुखभोग में व्यस्त हों वहां पर इन मुद्दों के बारे सोचना और विचार विमर्श करना महती आवश्यक हो जाता है।बचपन से ही लडके और लडकियों का भेद उनमे एक दुसरे के प्रति जिज्ञासु बना देता हैं। शिक्षण संस्थानों को  भी लिंग आधारित बना देना इसको और बड़ा देता है। यहाँ पे कुछ तर्क हैं जिनकी वजह से हम सह -शिक्षा को अनिवार्य किये जाने के पक्ष में हैं:•प्रथम तो यह लडके और लडकियों के सही समाजीकरण में सहायक होता है .•दूसरा यह है की लिंग आधारित शिक्षण संस्थानों में जो मानसिकता विकसित होती हैं वह ज्यादा हानिकारक है.•एक समूह में लडके लडकियाँ इक्कठे रहते वहाँ पर जो मानसिकता विकसित होती है वह बहुत हद तक उनके अकादमिक  और सामाजिक समायोजन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान देती है .•मानसिक और भावात्मक विकास भी बहुत जरूरी है, अगर सही समय पर उनका सही विकास हो तो उनकी योग्यता और ज्यादा निखर के सामने आती है.•बिना सामाजिक सुरक्षा के जो सम्बन्ध विकसित होते हैं वह लघु और अस्थिर होते हैं .•समाज अगर सही मायने में नारी की इज्जत करना शुरू कर दे और उनकी सामाजिक सुरक्षा के प्रति एकजुट हो जाये तो हमारे समाज का भविष्य सुधर सकता है. जिस परिवार और समाज में नारी का सम्मान नही होता वह पर  निम्न मानसिकता  का होना सम्भव ही होता है. आज का विचार और चिन्तन ही हमारे कल का निर्माण करता है  जब यह बात हमारे व्यक्तिगत जीवन में लागू होती है तो यह समाज में भी उतनी ही कारगर हैं। बस इसको आजमाने की जरूरत है.

Link:
http://msesaim.wordpress.com/2013/05/02/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%b5/

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