Mamta Rani
Mamta Rani campaign leader

महिलाओं पर नेताओं के बेतुके बोल..

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बेटे और जंगीपुर से कांग्रेस के सांसद अभिजीत मुखर्जी ने गैंग रेप के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर कैंडल मार्च करने का फैशन चल पड़ा है। अभिजीत ने कहा कि लड़कियां दिन में सज-धज कर कैंडल मार्च निकालती हैं और रात में डिस्को जाती हैं।
अभिजीत ऐसे बेतुके बयान देने वाले अकेले नहीं हैं। ऐसे नेताओं की लिस्ट लंबी है। आगे देखिए तो जरा...
1. सीपीएम के सीनियर नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अनीसुर रहमान ने मर्यादा की सारी हदें तोड़ दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि वह रेप के लिए कितना चार्ज लेंगी।
3. मुंबई आतंकी हमले के बाद बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने नेताओं के खिलाफ नारेबाजी कर रहीं कुछ महिलाओं के बारे में कहा था कि ये लिपस्टिक-पाउडर लगाकर क्या विरोध करेंगी। नकवी ने इन महिलाओं की तुलना कश्मीर के अलगाववादियों से कर दी थी। उन्होंने कहा था कि नेताओं के विरोध में नारे लगाने वाले ग्रुपों की जांच होनी चाहिए।
4. 2008 में युवा टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान पर विवाद हुआ था। शीला ने कहा था, 'इतना अडवेंचरस नहीं होना चाहिए। वह एक ऐसे शहर में सुबह के तीन बजे अकेली गाड़ी चलाकर जा रही थी जहां रात के अंधेरे में महिलाओं का निकलना बहुत सुरक्षित नहीं माना जाता, मुझे लगता है कि हमें थोड़ा एहतियात बरतना चाहिए।'
5. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आजादी को रेप की वजह बताया था। उन्होंने कहा था कि लड़के-लड़कियों को माता-पिता द्वारा दी गई आजादी से ही बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं।
6. महिला आरक्षण विधेयक जब पहली बार संसद में रखा गया था तब जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा था कि इस विधेयक के जरिये क्या आप 'परकटी महिलाओं' को सदन में लाना चाहते हैं ?
7. हरियाणा प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता धर्मवीर गोयल ने रेप के लिए लड़कियों को ही दोषी ठहरा दिया था। उन्होंने कहा था कि नब्बे फीसदी मामलों में बलात्कार नहीं, बल्कि लड़कियां सहमति से संबंध बनाती हैं।
8. कुपोषण पर इंटरव्यू के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मिडिल क्‍लास परिवारों की लड़कियों को सेहत से ज्‍यादा खूबसूरत दिखने की फ्रिक होती है। उन्होंने कहा था कि अच्छे फिगर की चाहत में लड़कियां कम खाती हैं।
9. 2010 में मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि महिला आरक्षण बिल पास होने से संसद ऎसी महिलाओं से भर जाएगी, जिन्हें देखकर लोग सीटियां बजाएंगे। वहीं एक दूसरे बयान में उन्होंने कहा था कि बड़े घर की लडकियां और महिलाएं ही ऊपर तक जा सकती हैं क्योंकि उनमें आकर्षण होता है। इसलिए महिला आरक्षण बिल से ग्रामीण महिलाओं को कोई फायदा नहीं होगा।
10. टीएमसी विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती ने रेप पर दिए गए बयान में कहा था कि ऎसी वारदात के लिए कुछ हद तक लड़कियां भी जिम्मेदार हैं क्योंकि हर रोज उनकी स्कर्ट छोटी हो रही हैं।
UPDATE #1
दिल्ली गैंगरेप मामले के खिलाफ देशभर में गुस्से की आग भड़की और ये गुस्सा रायसीना हिल्स तक भी पहुंचा। दो दिनों तक रायसीना हिल्स पर गैंगरेप के आरोपियों को फांसी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली सरकार के साथ ही पुलिस की नींद उड़ा दी लेकिन रायसीना हिल्स से राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी बाहर नहीं निकले और न ही उन्होंने इस घटना पर दुख जताना जरूरी समझा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी न बोले न सही लेकिन पश्चिम बंगाल की जंगीपुर सीट से उनके सांसद बेटे अभिजीत मुखर्जी ने पिता की इस कमी को पूरी करने में देर नहीं की। कांग्रेस सांसद अभिजीत कहते हैं कि महिलाएं सज-धज कर प्रदर्शन करने आती हैं और कैंडिल मार्च निकालने के बाद डिस्को में जाती है। मुखर्जी साहब यहीं नहीं रूक वे कहते हैं कि कैंडिल मार्च निकालना फैशन हो गया है। बयान पर बवाल मचने के बाद भले ही मुखर्जी ने अपने शब्द वापस ले लिए हों लेकिन फिर भी वे ये कहने से नहीं चूके कि उन्होंने कुछ गलत कहा था। पिता की सीट पर बमुश्किल 2500 वोटों से उपचुनाव जीतकर संसद में पहुंचने वाले अभिजीत मुखर्जी को लगता है सुर्खियों में आने की कुछ ज्यादा ही जल्दी है। शायद यही वजह है कि एक ऐसे मुद्दे पर वे अपना मुंह खोलते हैं जिसको लेकर पहले ही जमकर बवाल मच चुका है। एक संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रपति मुंह नहीं खोलते लेकिन राष्ट्रपति का सांसद बेटा अगर ऐसा बोलता है तो वाकई में इससे बड़ा दुर्भाग्य इस देश का और क्या हो सकता है। होना तो ये चाहिए था कि राष्ट्रपति को खुद रायसीना हिल्स में बाहर निकलकर लोगों से शांति की अपील करते हुए मामले में दखल देना चाहिए था और सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और रही सही कसर राष्ट्रपति के सांसद बेटे ने पूरी कर दी। आभिजीत मुखर्जी ने तो प्रदर्शनकारियों पर ही सवाल खड़ा कर दिया कि ये प्रदर्शन तो सिर्फ एक दिखावा था। मुखर्जी साहब कभी एसी कमरों से बाहर निकल कर दिल्ली की सर्दी में एक रात छोड़िए एक घंटा बिताकर दिखा दीजिए आंदोलन और फैशन का फर्क आपको शायद समझ में आ जाएगा..! मुखर्जी साहब जिसे आप फैशन बोल रहे हैं ये न सिर्फ एक पीड़ित को इंसाफ दिलाने की लड़ाई है बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की ओर महिलाओं की तरफ से बढ़ाया हुआ कदम था लेकिन अफसोस है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुई इस लड़ाई को न तो आपके पिताश्री समझ पाए जबकि वे तो इन प्रदर्शनकारियों से चंद कदम दूर थे और न ही आप। अरे साहब किसी पीड़ित का दर्द नहीं समझ सकते न सही कम से कम उनके जख्मों पर नमक तो मत छिड़किए। आप पीड़ित का दर्द कम नहीं कर सकते तो उसके जख्मों को कुरदने का भी आपको कोई अधिकार नहीं है। कटाक्ष करने के बाद आपने भले ही माफी मांग ली हो लेकिन जुबान से निकला हुई तीर वापस तो नहीं होता न…बोलने से पहले सोच तो लिया करो महाराज कि क्या बोलने जा रहे हैं…अपना न सही अपने पिताजी के पद और गरिमा का तो कम से कम ख्याल रखिए। आपके पिताजी ने तो चुप रहना ही बेहतर समझा लेकिन आपने तो पिताजी की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।

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