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आन्दोलन में जेल जानेसे पहले कुछ जरुरी चीजे याद रक्खे. ***MUST READ***

JAIL BHARO ANDOLAN, 30, 31 DEC 2011 AND 1 JAN 2012.

३० दिसंबर २०११, जेल भरो आन्दोलन के लिए क्या हम तैयार है?

१) जेल भरो आन्दोलन से डरने की कोई बात नहीं, जो डरता है उसे आन्दोलन में आनेकी जरुरत भी नहीं. बाहर रहके भी देशसेवा की जा सकती है. ये कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं के पोलिस आपपर कोई व्यक्तिगत कारवाई करे. अतः न डरे.

२) जेल भरो आन्दोलन याने, पहले पोलिस आपको पोलिस थाना ले जाती है, महिलाओको रात में पोलिस स्टेशन नहीं रख सकते अतः या तो उन्हें तुरंत (या ८ या ९ बजे से पहले) छोड़ दिया जाता है या फिर उसी दिन विशेष मजिस्ट्रेट के सामने ले जाती है और दंडात्मक कारवाई करती है. मर्दोको भी उसी दिन या अगले दिन सुबह कारवाई करते है. ९९.९९% मामलो में जज लोगो को "आपको ऐसा फिरसे नहीं करना है!" ऐसा समझाकर छोड़ देते है अगर कोई ज्यादा उपद्रवी हो तो ही जरा विशेष दंड होता है वरना छोड़ना ही पडता है. इसमें सिर्फ सिविल ओफ्फेंस (civil offence) बनता है, लेकिन क्रिमिनल ओफ्फेंस नहीं हो सकता. सिविल ओफ्फेंस में आपके करिअर या कामधंदे पर कोई असर नहीं होता. अगर आपने कोई हिंसा न की हो तो बिना चार्जशीट के तुरंत रिहाई, चार्जशीट के बाद रिहाई या दो तीन दिन का जेल, या कुछ मामूली आर्थिक दंड हो सकता है. इसमें जमानत भी होती है.

३) अफवाहोपर विश्वास न रक्खे और न ही उसे फैलने दे. आन्दोलन के समय कुछ लोग आपको बोलेंगे के अन्ना जी को या केजरीवाल जी को पुलिस ने या किसी और ने गोली मार दी, ऐसे में आप अपना आपा खोने की और हिंसा पर उतरके तोड़फोड़ करनेकी संभावना होती है. ऐसा न खुद करें और न किसी को करने दे. ये विरोधी लोगो की रणनीति और चाल होती है और वो इसी के ताक में रहते है. इसीलिए अफवाहोपर विश्वास न रक्खे. वह वक्त दिमाग से सोचनेका होता है, दिल से नहीं.

४) अन्ना जी का आन्दोलन में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. यह आन्दोलन संपूर्ण अहिंसा के मार्ग से चलता है और इसीमे अन्ना जी के हर आन्दोलन...

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